सोमवार, 22 अप्रैल 2013

एक सवाल - महिला दिवस पर?


एक सवाल 
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मैंने अक्सर देखा है 
लोगों को रोते हुए 
लड़की के जन्म लेते ही 
आँखों से आंसू टपकते हुए 
हर तरफ मातम सा छाते हुए...

मैंने अक्सर देखा है 
लड़कियों को यह सुनते हुए 
की तू बोझ है,
तुझे पराया घर जाना है 
तेरे हाथ पीले करने है 
तुझसे पिंड छुराना है...

मैंने अक्सर देखा है 
बहुओं को आंँसू बहाते हुए 
चुपचाप दुःख सहते हुए
कभी पिटते हुए,
कभी कोई बोझ सहते हुए 
कभी भाग्य पर रोते हुए,
उसके भाग्य में क्या यही लिखा है
ये जगवालों
क्या नारी की यही कथा है? 

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