सोमवार, 22 अप्रैल 2013

सच्ची - पहलू - की - झलक


बापू के वचन को भूल रहे है
भारत माता को छोड़,
नेताओं की जय बोल रहे है
ये दिल बता
मैं किसकी जय बोलू।
अधिकारों के लिए लड़ रहे है
कर्त्तव्यों की डोरी छोड़,
अपने-अपने संघों की
जय बोल रहे है,
ये दिल बता
मैं किसकी जय बोलू।
मंदिर-मस्जिद के लिए
लड़ रहे है,
गोलियों की पिचकारी छोड़
संम्प्रदायों की जय
बोल रहे है,
ये दिल बता
मैं किसकी जय बोलू।
शिक्षक पढ़ाने से
मुंह मोड़ रहे है,
विद्यार्थी भी पढ़ना छोड़
सिर्फ 26 जनवरी
और 15 अगस्त को,
भारत-माता की जय
बोल रहे है,
ये दिल बता
मैं किसकी जय बोलू।

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